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शबे मेराज में इबादत करने में क्या हरज है ?

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⭕आज का सवाल नंबर ९८९⭕ शबे मेराज में इबादत करने में क्या हरज है ? आज का जवाब حامدا و مصلیا و مسلما शबे मेराज की इबादत *वह रात अज़ीमुशशान थी* और अगर बिल फ़र्ज़ ये तस्लीम भी कर लिया जाये के आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम २७ रजब ही को मेराज तशरीफ़ ले गए थे, जिस में ये अज़ीमुशशान वाक़िअ पेश आया और जिसमे अल्लाह ताला ने नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को ये मक़ाम अता फ़रमाया और अपनी बारगाह में हाज़री का शरफ़ बख्शा , और उम्मत के लिए नमाज़ों का तोहफा भेजा, बेशक वो रात बड़ी अज़ीमुश शान थी, किसी मुस्लमान को उसकी अज़मत में क्या शुबह हो सकता है ? *आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़िन्दगी में १८ मर्तबा शब् ए मेराज की तारिख आयी लेकिन* ये वाक़िआ सं ५ नबवी में पेश आया यानि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नबी बनने के पांचवे साल ये शब् ए मेराज, जिसका मतलब ये है के इस वाक़िआ के बाद १८ साल तक आप दुन्या में तशरीफ़ फरमा रहे, लेकिन इन १८ साल के दौरान ये कही साबित नहीं के आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने शब् ए मेराज के बारे में कोई ख़ास हुकुम दिया हो, या उस को मनाने का एहतेमाम फ़रमाया हो, या उसके बारे में ये फ़रमाया हो...

सूद की रक़म का क्या करे

आज का सवाल नंबर ९६३ मेरे पास सूद की रक़म है तो वह किस को दूँ ? आज का जवाब حامدا و مصلیا و مسلما सूद की रक़म का असल हुक्म तो ये है के जिस के पास से लिया हो उस को ही वापस लौटाना चाहिए अगर बैंक का सूद हो तो उस के असल मालिक मालूम नहीं होते लिहाज़ा इस को पाखाना और गुनाहों का बोझ समझते उस के वबल से बचने की निय्यत से बगैर सवाब की निय्यत से गरीब को दे देना चाहिए. फतावा महमूदियाह १६ /३८१ किताबुल मसाइल ११ /२२७ से माख़ूज़ واللہ اعلم ✏मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन हनफ़ी गुफिर लहू

क्रिकेट खेलने के १० नुकसान

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⭕आज का सवाल नंबर ९६२⭕ क्रिकेट देखना और खेलने का क्या हुक्म है ? इस से वर्ज़िश भी होती है ? जवाब حامدا و مصلیا و مسلما क्रिकेट खेलने में हस्बे ज़ैल खराबियां है. १. इसमें खेलने वाले के जिस्म को सख्त नुकसान पहोंचता है, बाजों की टाँगें टूटना और बाजों के सर या पेट में चोट लगने से मौत के मुंह तक पहोंच जाना हम ने खुद देखा है. २. आने जाने वालों को चलने और गाडी चलाने के रास्ते पर खेलने की वजह से गुजरने में तकलीफ होना, कोई इंसान बल्कि कोई हैवान भी इत्मिनान से गुज़र नहीं सकता. ३. आने जाने वाली गाड़ियों को और खेलने वालों को एक्सीडेंट की वजह से जान जाने या चोट आने का खतराः. 4. आने -जाने वालों और आजु -बाजु के लोगों को बॉल या बेट से चोट लगने का खतराः बल्कि बाज़ की आँखें फूटने और बाजों के चेहरे बदलने के वाकिआत भी पेश आते रहते है. 5. पड़ोसियों के घरों के शीशे या खिड़कियां टूट जाना. ६. आउट होने न होने में जूठ, धोका, झगडे, दिली रंजिश, किना , दुश्मनी अदा...

मांग निकालने की सुन्नत

⭕आज का सवाल नंबर ९६१ ⭕ सर में मांग कहाँ से निकालना सुन्नत है ? मर्द औरत दोनों के लिए बताने की गुज़ारिश. आज का जवाब حامدا و مصلیا و مسلما नाक के मुक़ाबिल दरमियान से मांग निकलना मर्दों और औरतों दोनों के लिए सुन्नत है. दाएं या बाएं या मांग निकलना इस्लामी तरीक़ह नहीं है. दाढ़ी और अंबिया की सुन्नतें सफा ९३ हज़रत मुफ़्ती सईद साहब पालनपुरी डा.ब. शैखुल हदीस दारुल उलूम देवबंद फतावा कास्मियाह २३ /५८५ واللہ اعلم ✏मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन हनफ़ी गुफिर लहू