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रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ें

⭕आज का सवाल नंबर १०२७⭕ रोज़ा किन चीज़ों से फ़ासिद हो जाता है? 🔵जवाब🔵 *(बाक़ी कल के मेसेज से आगे)* १२- मुश्टजानि-हाथ से मनि निकालना १३- अमाह के मरीज़ का इनहेलर -पंप इस्तेमाल करना. १४- मुंह में पान-गुटखा दबा कर सो जाना यहाँ तक के सुबह सादिक़ हो जाये. १५- नकसीर फूटे और नाक का खून हलक़ में चला जाये. १६- दांत-मसूड़ों का खून अगर इतना ज़्यादा हो के वह थूक पर ग़ालिब आ जाये यानि थूक को लाल कर दे या थूक के बराबर-सरबर हो जाये और वह थूक पेट में चला जाये, अगर थूक में खून काम हो यानि खून का मज़ा हलक़ में मालूम ना हो तो रोज़ा फ़ासिद न होगा १७- इनामा लेना यानि पेट की सफाई के लिए पीछे के रास्ते दवाई चढ़ाना १८- मर्द की पेशाब की नाली में कोई दवाई डाली जाये और वह मसाने तक पहुंच जाये. अगर मसाने तक ना पहुंचे तो रोज़ा फ़ासिद नहीं होगा १९- औरत का अपनी शर्मगाह में कोई दवाई डालना २०- औरत की शर्मगाह में डॉक्टरनी का चेकउप के लिए भीगा हुवा या दवाई वाला हाथ या मशीन डालना, अगर हाथ या मशीन पर दवा ना हो...

रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ें

⭕आज का सवाल नंबर.१०२६⭕ रोज़ा किन चीज़ों से फ़ासिद हो जाता है? 🔵जवाब🔵 वो चीज़े जिनसे रोज़ा फ़ासिद हो जाता है वह निचे लिखा गया हैं १- कान और नाक में दवा डालना. २- क़सदन (जान बूझकर) मुँह भरकर के-वोमिट करना या मुँह भरकर आने के बाद कुछ हिस्सा क़सदन-जानबूझकर लोटा लेना. ३- कुल्ली करते हुवे हलक़ में पानी का चला जाना,( उस वक़्त रोज़ा भी याद हो ) ४- औरत को छूने और बोसा लेने से इंज़ाल हो जाना -मनि निकल जाना. ५- लोबान या अगरबत्ती का धुंवा क़सदन नाक या हलक़ में पहुँचाना ६- बीड़ी, सिगरेट, हुक़्क़ाह पीना ७- भूलकर खा पि लिया और ख्याल किया के इससे रोज़ा टूट गया होगा, फिर क़सदन खा,पी लिया ८- रात समझकर सुबह सादिक़ के बाद सहरी खा लेना, ९- दिन बाक़ी था मगर गलती से ये समझा के आफताब ग़ुरूब हो गया हे, इफ्तार कर लिया -किसी तक्वीम या एप्प में देखकर वक़्त होते ही इफ्तार कर लिया बाद में पता चला घडी आगे थी और सूरज ग़ुरूब होने में २ मिनट बाकी थी.(अक़ाबरीन के मामूल के खिलाफ इस से बिलकुल टाइम पर इ...

रोज़े की क़ज़ा और कफ़्फ़ाराह का उसूल

⭕आज का सवाल नंबर १०२५⭕ रोज़ा तोड़ने की वजह से क़ज़ा और कफ़्फ़ाराह कब वाजिब होता है और कब नहीं? इस का क्या उसूल है? 🔵 आज का जवाब🔵 حامدا و مصلیا و مسلما वह सूरतें जिन से कफ़्फ़ाराह और क़ज़ा दोनों वाजिब है वो ये है, १. रमजान के अदा रोज़े में बिला उज़्र जानबूझकर ऐसी चीज़ खाना जो ग़िज़ा-खाने के तौर पर या दवाई के तौर पर ही खायी जाती हो या कामिल लज़्ज़त के तौर पर हो इस्तिमाल होती हो खा पी लेना या इस्तिमाल करना. इस से मालूम हुआ के कच्चा खाना खाने से,बीड़ी पिने से,लगाने की दवा निगल जाने से, हाथ से मणि निकालने से (ऐसे पर अल्लाह की लानत है),बव से सिर्फ चिमटने या बोसा लेने से इंज़ाल हो गया तो कफ़्फ़ाराह नहीं. इन चीज़ों ग़िज़ाइयत, दवाईयत, कामिल नफा कामिल लज़्ज़त नहीं. २. जानबूझ कर सोहबत करना. ३.आंख में दवा लगाई या उलटी हुई फिर ये समझकर के रोज़ा टूट गया हालांकि इन दोनों से रोज़ा नहीं टूटा था फिर भी जानबूझ कर खा पी लिया. *वह शक्लें जिन में क़ज़ा है कफ़्फ़ाराह नहीं है वो ये ह...

चार रकत पर पढ़ने की दुआ की हक़ीक़त.

*चार रकत पर पढ़ने की दुआ की हक़ीक़त* ⭕आज का सवाल नंबर १०२४ ⭕ तरावीह की चार ४ रकात के बाद जो दुआ पढ़ी जाती है वह हदीस से साबित है? 🔵 आज का जवाब🔵 حامدا و مصلیا و مسلما तरावीह की हर ४ रकात के बाद जो दुआ पढ़ी जाती है उसके अल्फ़ाज़ मुख्तलिफ अहादीस से साबित हैं उसमे बाज़ हदीस की सनद बहोत ही कमज़ोर है. पूरी दुआ किसी एक हदीस में नहीं आयी है. और उसको तरविहा(तरावीह की चार रकात) के बाद पढ़ना किसी भी हदीस से साबित होना बहोत मुश्किल है. यह दुआ अल्लामाह इब्ने आबेदीन अपनी किताब शामी में नक़ल की है जिसकी वजह से मुख्तलिफ किताबों और हमारे इलाक़ों में राइज हो गयी तरविहा में हनफ़िया के नज़दीक ३ इख़्तियार है उस वक़्त तस्बीह पढ़े, या हम्द करे, या खामोश रह कर अगली रकात का इन्तिज़ार करे. 📗 मूहिते बुरहानी २/१८१ 📕जवहरून नय्याराह सफा ३८५ 📘मर्गूबुल फतवा ३/४२९ में उलमा ऐ देवबंद का ये मौक़फ़ लिखा है के उस वक्त ज़िक्र करना मुस्तहब है लेकिन बहोत से इलाक़ों में इस में गुलु होने लगा है. मुस्तहब के साथ वाजि...

चार रकत पर पढ़ने की दुआ की हक़ीक़त.

*चार रकत पर पढ़ने की दुआ की हक़ीक़त* ⭕आज का सवाल नंबर १०२४ ⭕ तरावीह की चार ४ रकात के बाद जो दुआ पढ़ी जाती है वह हदीस से साबित है? 🔵 आज का जवाब🔵 حامدا و مصلیا و مسلما तरावीह की हर ४ रकात के बाद जो दुआ पढ़ी जाती है उसके अल्फ़ाज़ मुख्तलिफ अहादीस से साबित हैं उसमे बाज़ हदीस की सनद बहोत ही कमज़ोर है. पूरी दुआ किसी एक हदीस में नहीं आयी है. और उसको तरविहा(तरावीह की चार रकात) के बाद पढ़ना किसी भी हदीस से साबित होना बहोत मुश्किल है. यह दुआ अल्लामाह इब्ने आबेदीन अपनी किताब शामी में नक़ल की है जिसकी वजह से मुख्तलिफ किताबों और हमारे इलाक़ों में राइज हो गयी तरविहा में हनफ़िया के नज़दीक ३ इख़्तियार है उस वक़्त तस्बीह पढ़े, या हम्द करे, या खामोश रह कर अगली रकात का इन्तिज़ार करे. 📗 मूहिते बुरहानी २/१८१ 📕जवहरून नय्याराह सफा ३८५ 📘मर्गूबुल फतवा ३/४२९ में उलमा ऐ देवबंद का ये मौक़फ़ लिखा है के उस वक्त ज़िक्र करना मुस्तहब है लेकिन बहोत से इलाक़ों में इस में गुलु होने लगा है. मुस्तहब के साथ वाजि...

तरावीह की रकात छूट जाना

⭕आज का सवाल नंबर १०२३⭕ एक आदमी मस्जिद में ऐसे वक़्त आया के ईशा की फ़र्ज़ नमाज़ और तरावीह की दो चार रकत हो चुकी थी तो छूती हुई तरावीह किस तरह पढ़े? और वित्र बाजमात पढ़े के छूती हुई तरावीह को पूरी करने के बाद पढ़े? 🔵 आज का जावाब🔵 حامدا و مصلیا و مسلما ऐसे शख्स को चाहिये के पहले फ़र्ज़ और सुन्नतें पढ़े, और उस के बाद तरावीह में शरीक हो, और छूती हुई तरावीह दो तरविहा (४ रकात के बाद थोड़ी देर बैठने का वक़्फ़ा) के दरम्यान पूरी करे, अगर मौक़ा ना मिले तो वित्तरों के बाद पढ़े, और वित्र और तरावीह की जमात छोड़कर तन्हा अलग ना पढ़े 📘मसाइले तरावीह रफत सफा ७७ बहवाला कबीरी ✏मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन हनफ़ी गुफिर लहू 🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा सूरत गुजरात इंडिया

तरावीह की निय्यत और हुक्म

⭕आज का सवाल नंबर २०२२⭕ अ. तरावीह का क्या हुक्म है? पढ़ना ज़रूरी है ? मर्द औरत दोनों के लिए एक ही हुक्म है ? ब. तरावीह की निय्यत क्या करे? क. २० रकात की निय्यत साथ में कर सकते है? 🔵जवाब🔵 अ. तरावीह मर्दों और औरतों सब के लिए पूरा महीना सुन्नते मुअक्कदह है.मगर औरतों के लिए जमात सुन्नते मुअक्कदह नहीं है. 📘किफ़ायतुल मुफ़्ती ३/३६१ सुन्नते मुअक्कदह को बिला उज़्र छोड़ना मना है और छोड़ने की आदत बनाने वाला फ़ासिक़ और गुनेहगार है. ब. तरावीह की निय्यत का वही तरीका है जो दूसरी नमाज़ों का है. उस की निय्यत इस तरीका से है के, दो रकत सुन्नत तरावीह की निय्यत करता हूँ, दिल में सोचकर या कहकर, अल्लाहु अकबर कहकर नमाज़ बांध ले. 📘मज़ाहिरे हक़ जदीद १४ क. तरावीह के शुरू में २० रकात की निय्यत काफी है हर दो रकात पर निय्यत शर्त नहीं. 📘फतावा रहीमिययह १/३५४ 📘मसाइले तरावीह रफत ७०,७१ واللہ اعلم ✏मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन हनफ़ी गुफिर लहू 🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा सूरत गुजरात...