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शश ईद के रोज़े कैसे रखे?

*SHASH EID ROZE KAISE RAKHE?* ⭕आज का सवाल नंबर.१०५४ ⭕ शश ईद के ६ रोज़े कब रखना शुरूआ करना चाहिए ? ६ लगातार रखना ज़रूरी है या अलग अलग भी रख सकते है ? 🔵जवाब🔵 पुरे शव्वाल के महीने में कभी भी रख सकते है. अलग अलग-फासला कर के रखना बेहतर है मुसलसल लगातार रखना भी मकरूह नहीं. 📗फतावा दारुल उलूम ६/४९१ बाहवाला शामी واللہ اعلم ✏मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन हनफ़ी गुफिर लहू 🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा सूरत गुजरात इंडिया *SHASH EID ROZE KAISE RAKHE?* ⭕आज का सवाल नंबर.१०५४ ⭕ शश ईद के ६ रोज़े कब रखना शुरूआ करना चाहिए ? ६ लगातार रखना ज़रूरी है या अलग अलग भी रख सकते है ? 🔵जवाब🔵 पुरे शव्वाल के महीने में कभी भी रख सकते है. अलग अलग-फासला कर के रखना बेहतर है मुसलसल लगातार रखना भी मकरूह नहीं. 📗फतावा दारुल उलूम ६/४९१ बाहवाला शामी واللہ اعلم ✏मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन हनफ़ी गुफिर लहू 🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा सूरत गुजरात इंडिया

ईद मुबारक कहना

🔴आज का सवाल नंबर. १०५३🔴 आज कल लोग ईद के मवका पर ईद मुबारक कहते है इस का क्या हुक्म है इस का कोई शरीअत में सुबूत है ? 🔵जवाब🔵 लफ़्ज़े ईद मुबारक को सुन्नत और ज़रूरी समझे बगैर इन अलफ़ाज़ से मुबारक बादी देने में कोई हरज नहीं. मुस्तहब ये है के निचे के लफ़्ज़ों से मुबारकबादी दी जाये. हज़रात वसीलाह रदियल्लाहु अन्हु  फरमाते है के मेने नबी ए करीम सलल्लाहु अलैहि वसल्लम से ईद के दिन मुलाक़ात की है और मेने कहा *तकबल्लाहु मिन्ना व मिन्क* *अल्लाह हमारे और तुम्हारे नेक अमल क़बूल फरमाएं.* नबी सलल्लाहु अलैहि वसललम ने इरशाद फ़रमाया हाँ ज़रूर *तकबल्लाह मिन्ना व मिन्क* (सुनने बैहक़ी लील कुबरा हदीस नंबर ६०८८) अल्लामह अल्बानी रहमतुल्लाहि अलैहि ने इस हदीस की ताईद की है. और साहिबे हील्याह ने और मुहक़ीक़ इब्ने अमीरुल हाज ने सहीह सनदों के साथ बहोत से आसारे सहाबा नक़ल किये है और मुबारक के मवके पर बरकत की दुआ देना भी साबित है इस से ईद मुबारक कहना जाइज़ है 📚(मुहक़्क़क़ व मुदल्लल जदीद मसाइल (मुफ़्ती जाफर साहब रहमानी की) सफा १०१ बा हवाला 📘रद्दुल मुहतर आला दुर्रिल मुख़्तार ३/४७ किताबुस सलात) 📕 खैरुल फतावा ...

मुसाफह और मुआनकह

🔴आज का सवाल नंबर १०५२🔴 मुसाफह और मुआनकह कब करे ? 🔵जवाब🔵 जब भी मुस्लमान भाई से मुलाक़ात हो सब से पहले उसे सलाम करे फिर मुसाफह करे पहल करने वाले पर अल्लाह की ९० रहते उतरती है और दूसरे पर १० और जुड़ा होने से पहले अल्लाह ताला दोनों की मगफिरत फरमा देते हैं (मज़ाहिरे हक़) मुसाफह सलाम का तकमीलाह है यानि उस से सलाम मुकम्मल होता है और सलाम के बाद करना चाहिए. ईद के दिन नमाज़ के बाद मस्जिद में मुसाफह शियों की मुशाबेहत की वजह से मना है मस्जिद के बहार अगर मुलाक़ात न हुई हो तो मुलाक़ात की निय्यत से मुसाफा करे. ईद की खास सुन्नत और तरीकाः समझ कर न करे और मुआनकह सफर से आने के बाद या पहली बार मुलाक़ात हो रही हो तो मुआनकह करना चाहिए, ईद की मख़सूस रस्म समझकर मुआनकह न करे मुल्ला अली करि रहमतुल्लाहि अलैहि लिखा है फिर भी कोई मुसाफह के लिए हाथ बढ़ाये तो हाथ न खींचे हाथ खींचने में उस की ज़िल्लत होगी और उसे तकलीफ पहुंचेगी और ये हराम है, उस वक़्त मुसाफा कर ले फिर प्यार मुहब्बत से समझा दे, गरज़ नफरत का माहौल पैदा हो ऐसी कोई सूरत इख़्तियार न करे. हम एहले सुन्नत व जमात हैं, जो इबादत हुज़ूर सलल्लाहु अलैहि वसल्ल...

सदक़ए फ़ित्र कब दें ?

⭕आज का सवाल नंबर १०५१⭕ सदक़ए फ़ित्र कब देना चाहिए ? रमजान में दे सकते है ? ईद के दिन नहीं दिया तो क्या हुक्म है ? حامدا و مصلیا و مسلما 🔵जवाब🔵 सदक़ा फ़ित्र ईद के दिन ईदगाह में जाने से पहले देना चाहिए. रमजान में भी दे सकते है और ईद के दिन नहीं दिया तो मुआफ नहीं होता अब किसी भी दिन दे दें. 📗मसाइले रोज़ा सफा १८६,१८९ से माखूज़ واللہ اعلم ✏मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन हनफ़ी गुफिर लहू 🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा सूरत गुजरात इंडिया 📲 Download App - Goo.gl/mg4455 posted from Bloggeroid

सदक़ा ए फ़ित्र के वुजूब का वक़्त

⭕आज का सवाल नंबर.१०५०⭕ सदक़ा ए फ़ित्र किस वक़्त वाजिब होता है और किस वक़्त नहीं ? 🔵जवाब🔵 सदक़ा ए फ़ित्र ईद की सुबह सादिक़ के वक़्त वाजिब होता है लिहाज़ा वह बच्चा जो सुबह सादिक़ से पहले पैदा हुवा या जो सुबह सादिक़ से पहले साहिबे निसाब हो गया या सुबह सादिक़ से पहले ईमान लाया तो उन पर वाजिब है लेकिन वह बच्चा जो सुबह सादिक़ के बाद पैदा हुवा या कोई सुबह सादिक़ के बाद मालदार हुवा या सुबह सादिक़ से पहले गरीब हो गया वह शख्स जो ईद की सुबह सादिक़ बाद ईमान लाया या सुबह सादिक़ से पहले मर गया तो उन पर उन के माल में से देना वाजिब नहीं. 📗मसाइल रोज़ा सफा २०८ واللہ اعلم ✏मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन हनफ़ी गुफिर लहू 🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा सूरत गुजरात इंडिया

फितरा कितना & क्या

⭕आज का सवाल नंबर १०४९⭕ एक आदमी का फितरा कितने रुपये है और क्या चीज़ दे सकते है? 🔵जवाब🔵 حامدا و مصلیا و مسلما सदका ए फ़ित्र में हर क़िस्म का गल्ला (अनाज) और क़ीमत देना जाइज़ है, उसकी तफ्सील ये है अगर गेहूं या उसका आटा दे तो हर आदमी का पौने दो किलो (१ किलो ७५० ग्राम) देना चाहिए, अगर गेहूं के अलावा और कोई गल्ला (अनाज) मसलन चावल, बाजरा, जवार, वगैरह दे तो पौने दो किलो गेहूं की क़ीमत या साढ़े तीन किलो (३ किलो ५०० ग्राम) जव की क़ीमत में जितना वो गल्ला आता हो इतना गल्ला देना चाहिए, और अगर क़ीमत दे तो पौने दो किलो गेहूं या साढ़े तीन किलो जाव की कीमत देनी चाहिए, ➡(आज के हिसाब से ५० रुपये अदा करने होंगे) सब से बेहतर फ़ित्र ये है के, आज कल छुआराः (खारेक) या किसमिस (सुखी दराख) की कीमत और वज़न का निसाब ज़ियादा है, लिहाज़ा साढ़े तीन किलो खारेक या दराख की कीमत बेहतर है, हदीस में है के अल्लाह तुम्हे ज़ियादा दे तो तुम भी ज़ियादा दो. ✳कॉमन फितरा गेहूं की क़ीमत रु ५० [साल २०१७] ✳ गुड फितरा साढ़े तीन किलो जव या उस की क़ीमत रु.१०० (साल २०१७) ✳बेटर फितरा साढ़े तीन किलो खजूर या उस की क़ीमत...

एतिकाफ में जाईज़ काम

⭕आज का सवाल नम्बर १०४३⭕ एतकाफ की हालत में जाइज़ काम कौन कौन से है? 1- खाना पीना ( बशर्ते के मस्जिद को गन्दा न किया जाये), 2- सोना, 3- ज़रूरत की बात करना, 4- अपना या दुसरे का निकाह करना, 5- कपडे बदलना, 6- खुशबु लगाना, 7-तेल लगाना, 8- कंघी करना (बशर्ते के मस्जिद की चटाई और कालीन वगेरा ख़राब न हो ), 9- मस्जिद में किसी मरीज का मुआयना करना, नुस्खा लिखना या दवा देना, लेकिन ये काम बगैर उजरत के हो तो जाइज़ हे वर्ना मकरूह हे, 10- बर्तन धोना, 11- ज़रूरियाते ज़िंदगी के लिए घर का खर्चा चलने के लिए खरीद फरोख्त करना बशर्ते के सौदा मस्जिद में न लाया जाये, 12- औरत का ऐतिकाफ की हालत में बच्चो को दूध पिलाना, 13- मोअतक़िफ़ {ऐतिकाफ करने वाले} का अपनी निशिष्टगाह {खाने सोने की जगह} के इर्द गिर्द चादरे लगाना, 14- मोअतक़िफ़ का मस्जिद में अपनी जगह बदलना, 15- बक़द्रे ज़रूरत बिस्तर, साबुन, खाने पीने के बर्तन, हाथ धोने के बर्तन और मुताला के लिए दीनी किताबे मस्जिद में रखना. 📗मसाइले एतिकाफ से ...